मानव जीवन में शरीर को स्वस्थ रखने में व्यायाम का अत्यन्त ही महत्वपूर्ण स्थान है. व्यायाम व्यक्ति को सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखने में अपनी बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है और इतना ही नहीं, प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम करने से व्यक्ति में कई प्रकार की खतरनाक बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत हद तक विकसित होती है जो व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखने में काफी सहायक होती है.
ऐसा ही एक व्यायाम है जिसे 'कीगल' के नाम से जाना जाता है. यह एक ऐसा व्यायाम है जिसे हर एक उम्र की स्त्री और पुरुष को करना चाहिए जिससे स्त्री-पुरुष का यौन-जीवन भी बहुत ही बेहतरीन रूप से खुशहाल बना रहता है.
कीगल एक्सरसाइज को "पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज" भी कहा जाता है. पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों और उत्तकों की एक ऐसी श्रृंखला को कहते हैं जो व्यक्ति के पेल्विक के निचले भाग को एक-दूसरे के साथ जोड़कर रखने में सहायक होती है और यह अन्य कार्यों के अलावा व्यक्ति के मूत्र-प्रवाह को नियंत्रित करने के साथ-ही-साथ सेक्स के दौरान यौन-क्रियायों में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती है.
बढ़ती हुई उम्र के साथ ही बहुतेरे व्यक्तियों में यूरीन लीकेज की समस्या एक आम बात होती है. यों तो यह समस्या गर्भावस्था के बाद महिलाओं में बहुत ही ज्यादा देखने को मिलती है और इस समस्या से निजात पाने में कीगल एक्सरसाइज बहुत हद तक फायदेमंद सिद्ध होता है. हालांकि, डॉक्टर भी गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद महिलाओं की पेल्विक मांसपेशियों में सुधार के लिए इस व्यायाम को करने की सलाह पर ज्यादा जोर देते हैं और यह बहुत ही फायदेमंद भी होता है.
प्रायः बढ़ती हुई उम्र के साथ बहुतेरे कारणों से व्यक्ति की पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और इतना ही नहीं, स्त्रियों में तो गर्भावस्था, प्रसव तथा सर्जरी आदि के कारणों से उनकी मांसपेशियों में अत्यधिक तनाव आ जाता है, अतः ऐसी परिस्थिति में कीगल एक्सरसाइज करने से पेल्विक फ्लोर को अपेक्षित मजबूती प्राप्त होती है और जब पेल्विक फ्लोर मसल्स मजबूत होता है तो गर्भाशय और मूत्राशय भी बहुत हद तक स्वस्थ बना रहता है. अतः इस दृष्टि से भी यह एक्सरसाइज महिलाओं के लिए बहुतेरे मायनों में अपनी अत्यन्त ही महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है.
पुरुषों की भी कई समस्याओं से मुक्ति हेतु कीगल एक्सरसाइज बहुत ही फायदेमंद होता है. इस व्यायाम को कहीं भी किया जा सकता है और इसके लिए किसी प्रकार के उपकरण की भी कोई आवश्यकता नहीं होती. पुरुषों को भी इस व्यायाम को करने से उनके पेल्विक क्षेत्र को काफी मजबूती प्राप्त होती है और इतना ही नहीं, उसके लिंग में रक्त-संचार के प्रवाह को भी काफी बढ़त प्राप्त होती है, जिससे उसके लिंग में लंबे समय तक पर्याप्त उत्तेजना बनी रहती है. बार-बार कीगल एक्सरसाइज करने से व्यक्ति को न सिर्फ शीघ्र-स्खलन से ही मुक्ति मिलती है बल्कि उसका ऑर्गेज्म भी काफी हद तक मजबूत होता है जिसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति लंबे समय तक सेक्स की प्रक्रिया को काफी मजबूती के साथ निभा पाने में सक्षम हो पाता है.
इस व्यायाम को नियमित रूप से करने से व्यक्ति को रात्रि में बारम्बार पेशाब आने की समस्या से तो निजात मिलता ही है, बल्कि पेल्विक अंगों के बढ़ने को भी इस व्यायाम से सुगमता पूर्वक रोकने में भी काफी सहायता प्राप्त होती है.
हालांकि, स्त्रियों में मूत्र के अनियन्त्रण का सबसे बड़ा कारण उसकी गर्भावस्था से जुड़ा होता है. क्योंकि बढ़ते हुए भ्रूण से गर्भ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिसकी वजह से सामान्य महिलाओं की तुलना में गर्भवती महिलाएं बारम्बार यूरिन डिस्चार्ज के लिए बाथरूम जाती हैं. वैसे बढ़ती हुई उम्र भी एक प्रमुख कारण है जिससे बारम्बार यूरिन डिस्चार्ज में काफी वृद्धि होती है जिस पर नियन्त्रण पाने के लिए कीगल व्यायाम सबसे सरल, सुरक्षित और सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है क्योंकि यह एक ऐसा व्यायाम है जिसको प्रतिदिन नियमित रूप से करने पर बढ़ती हुई उम्र की वजह से जो पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो रही होती हैं वह बहुत हद तक मजबूत होने लगती हैं और इस वजह से व्यक्ति को अपने पार्टनर के साथ सेक्स की प्रक्रिया में भी काफी बेहतरीन अनुभूति की प्राप्ति होती है. अगर व्यक्ति प्रतिदिन नियमित रूप से इस व्यायाम को करता है तो इससे उसे बहुत हद तक शीघ्रपतन से मुक्ति के साथ ही अपने पार्टनर के साथ अत्यधिक समय तक सेक्स की प्रक्रिया में शामिल होने की अपेक्षित शक्तियां भी प्राप्त होती हैं और इतना ही नहीं, बल्कि उसकी मांसपेशियों की ताकत में भी अपेक्षाकृत काफी वृद्धि होती है. यहां एक बात ध्यान देने योग्य यह भी है कि बहुतेरे पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से मूत्र के असंयमित होने की स्थिति का सामना करना पड़ता है जो अत्यन्त ही कष्टप्रद होता है. रात्रि में उन्हें कई बार इस समस्या का सामना करना पड़ता है जो कि अत्यन्त ही चुनौतीपूर्ण होता है परन्तु इस बात की संवेदनशीलता की वजह से ज्यादातर लोग शर्मिंदगी के कारण यह स्वीकार ही नहीं करते हैं कि यह कोई समस्या भी है, बल्कि वह इसे बढ़ती हुई उम्र की एक सामान्य प्रक्रिया मानते हैं जो कि उनकी सेहत की दृष्टि से अच्छी बात नहीं है.
गौरतलब यह भी है कि व्यक्ति के जीवन में चालीस वर्ष की उम्र के बाद उसकी मांसपेशियां पूर्व की भांति सशक्त नहीं रह पाती हैं जिसकी वजह से उसका अपने मूत्राशय पर नियन्त्रण रखना अत्यन्त ही कठिन हो जाता है और इसका परिणाम यह होता है कि उसके मूत्राशय से अनावश्यक रूप से रिसाव होता रहता है और इसके कारण उसे अपने मूत्र को रोकने में बहुत ही ज्यादा परेशानी होती है. ऐसा कह सकते हैं कि वह एक प्रकार से ऐसा करने में पूरी तरह असमर्थ हो जाता है. खासकर महिलाओं में यह समस्या कुछ ज्यादा ही जटिल हो जाती है. ऐसे में यह व्यायाम स्त्री और पुरुष दोनों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है.
कीगल व्यायाम स्त्री और पुरुष दोनों ही के लिए अपने मूत्राशय पर नियन्त्रण रख पाने का अत्यन्त ही सुरक्षित और प्रभावी तरीका भी है.
अब यह प्रश्न उठता है कि कीगल एक्सरसाइज करने का सबसे आसान तरीका क्या है तो इसके लिए व्यक्ति को चाहिए कि वह सबसे पहले अपने लिए एक एकान्त स्थान का चयन करे और वहां एक मैट बिछा कर उसके ऊपर आराम से लेट जाए और अपने पैरों को घुटनों की तरफ से मोड़ते हुए उसे अपने कूल्हों के पास ले जाए परन्तु यहां इस बात का भी खास ध्यान रखे कि अपने पैरों को कुल्हों से चिपकाए नहीं और दोनों के बीच एक समान दूरी बनाए रखे और इसके साथ ही अपने दोनों हाथों को अपनी कमर से चिपका कर रखे. ऐसा करते हुए अपने-आपको थोड़ा जोर देते हुए अपने कूल्हों को जमीन से ऊपर उठाए और ऐसी स्थिति में तकरीबन दस सेकंड तक रहें और फिर आराम करते हुए इस प्रक्रिया को चार से पांच बार करे.
प्रतिदिन नियमित रूप से ऐसा करने से आपको इसका बहुत ही अच्छा फायदा मिलेगा और इसके साथ ही आपकी सेक्स लाइफ में भी काफी हद तक सुधार प्राप्त होगा.
दूसरा तरीका यह है कि आप मैट पर सुखासन की अवस्था में बैठ कर अपने दोनों पैरों को आगे की तरफ फैलाएं और फिर अपने घुटनों को मोड़ते हुए अपने पंजों को आपस में जोड़ें. तत्पश्चात अपने पंजों को अपने पेल्विक क्षेत्र की ओर ले जाएं परन्तु यहां इस बात का खास ध्यान रखें कि आपके पंजे खुलें नहीं तथा इसी अवस्था में अपने घुटने को ऊपर और नीचे की ओर हिलाएं और इसके साथ ही यह भी कोशिश करें कि आपके घुटने जमीन की सतह को नीचे आते हुए छूएं. ऐसा चार से पांच मिनट तक करें. ऐसा करने से आपकी पेल्विक मासपेशियों को तो मजबूती मिलेगी ही और साथ-ही-साथ इससे आपको अपने अनावश्यक तनाव से भी मुक्ति मिलेगी.
एक तरीका यह भी है कि आप मैट पर सुखासन की स्थिति में अपनी कमर को बिल्कुल सीधी अवस्था में रखते हुए बैठें और अपनी पेल्विक मांसपेशियों की तरह ध्यान देते हुए गहरी सांस लें तथा ऐसी अवस्था में कुछ देर तक रहने के बाद अपनी सांसों को बाहर छोड़ते हुए अपने पेल्विक मसल्स को ढीला छोड़ दें.
प्रतिदिन नियमित रूप से इस व्यायाम को करते रहने से आपके पेल्विक फ्लोर की मसल्स को बहुत ही मजबूती प्राप्त होती है और इससे यूरीन को लीक होने से रोकने में भी काफी हद तक मदद प्राप्त होती है.
गर्भावस्था में इस व्यायाम को करने से महिलाओं के शरीर में नॉर्मल डिलीवरी की सम्भावना काफी हद तक बढ़ जाती है और इतना ही नहीं, बल्कि प्रसव पीड़ा को भी कम करने में यह काफी मददगार सिद्ध होती है.
प्रतिदिन नियमित रूप से इस व्यायाम को करने से कमर दर्द में भी राहत प्राप्त होती है और खासकर इससे महिलाओं के शरीर को मेनोपॉज की स्थिति के लिए बहुत ही बेहतरीन तरीके से तैयार रखने में भी काफी हद तक मदद प्राप्त होती है.
प्रतिदिन नियमित रूप से इस व्यायाम को करने से पुरुषों के प्राइवेट पार्ट में रक्त संचार के प्रवाह में पर्याप्त मदद मिलती है और इतना ही नहीं, इससे शीघ्र पतन की समस्या से भी मुक्ति मिलती है तथा सेक्स लाइफ में भी बेहतरीन सुधार होता है.
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