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सेक्स और लिंग के आकार की सच्चाई

हमारी मानव सभ्यता की उत्पत्ति के समय से लेकर अब-तक यह प्रश्न प्रासंगिक है कि सेक्स की प्रक्रिया में लिंग के आकार का क्या महत्व है? क्या लिंग का आकार सेक्स के आनन्द को प्रभावित करता है?

पुरुषों के मन में चलने वाला यह प्रश्न उसके अन्दर उसे विभिन्न प्रकार की आशंकाओं के साथ ही भ्रांत धारणाओं के मकड़जाल में भी उलझाए रखता है.


इस सम्बंध में ध्यान देने योग्य बात यह है कि शुरू से ही पुरुष अपने प्रजनन अंग के आकार को लेकर विभिन्न प्रकार की भ्रांत धारणाओं के मकड़जाल में उलझ जाता है और ऐसी भ्रांत धारणाओं की वजह से व्यक्ति में मानसिक विकारों का जन्म होता है और जब भी सेक्स की प्रक्रिया में लिंग के आकार की बात आती है तो वह चिन्तित हो उठता है.


कई पुरुषों की यह मान्यता ​​है कि सेक्स सम्बन्ध स्थापित करने की प्रक्रिया में बड़ा लिंग अपेक्षाकृत छोटे लिंग से अच्छा परफॉर्म करता है, जबकि सही मायने में यह एक बहुत बड़ी भ्रांत धारणा है क्योंकि सेक्स सम्बन्ध स्थापित करने की प्रक्रिया में लिंग के छोटे या बड़े होने का कोई औचित्य ही नहीं है. और इतना ही नहीं, यौन-सुख के मामले में बड़ा या छोटा लिंग सेक्स से प्राप्त होनेवाले आनन्द में अपनी कोई भी ऐसी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह नहीं करता जो उसके महत्व को रेखांकित करता हो.


आज-कल इंटरनेट और स्‍मार्ट फोन की वजह से व्यक्ति को गुमराह करने वाले बहुत से आकर्षक और भड़काऊ विज्ञापनों की बड़ी भरमार है जिसे देखकर पुरुषों को अपने मन में अपने लिंग की लंबाई को लेकर बहुत ही हीन भावना घर करने लगती है तथा असन्तोष का भाव भी उत्पन्न होने लगता है और परिणाम यह होता है कि वह उन भड़काऊ विज्ञापनों के प्रति आकृष्ट होकर अपने लिंग के आकार को बढ़ाने के चक्‍कर में बहुत ही बुरी तरह फंस कर गुमराह होता रहता है.


अधिकांश पुरुषों की यही सोंच रहती है कि यदि उसके लिंग का आकार बड़ा नहीं होगा तो वह अपनी महिला पार्टनर को सम्भोग के दौरान सन्तुष्ट नहीं कर पाएगा जबकि सच्चाई तो यह है कि किसी भी महिला की यो​नि का ऊपरी हिस्सा ही इतना संवेदनशील होता है जो उसकी यौन-संतुष्टि के लिए पर्याप्त होता है और इसके लिए लिंग का आकार बड़ा हो इसकी कोई आवश्यकता नहीं होती.


अधिकांश पुरुषों की यही सोंच होती है कि अगर उसका लिंग छोटा है तो यह सिद्ध होता है कि उसकी मर्दानगी में कोई कमी है और उसके मन में यह भी डर बना रहता है कि उसकी महिला पार्टनर को उससे संतुष्टि प्राप्त होगी या नहीं.


हालांकि, कुछ लोगों के लिंग का आकार निश्चित रूप से छोटा होता है और इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता परन्तु ऐसा नहीं है कि ऐसा होने पर सेक्स की प्रक्रिया में शामिल होने पर उसकी महिला पार्टनर को संतुष्टि प्राप्त न हो! क्योंकि महिलाओं को तो अपनी योनि के अग्र भाग के कुछ ही भीतर लिंग के घर्षण मात्र से ही सम्भोग के पूर्ण आनन्द की अनुभूति होने लगती है तो ऐसे में यह कहना बेमानी होगी कि छोटे लिंग के बनिस्बत बड़े आकार के लिंग से ही किसी भी व्यक्ति की महिला पार्टनर को सेक्स सम्बंध स्थापित करने पर आनन्द की प्राप्ति सम्भव है.


सेक्स सम्बंध स्थापित करने की प्रक्रिया में शामिल लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं के साथ यही पाया गया है कि उन्हें सेक्स सम्बंध स्थापित करने के दरम्यान उनके पुरुष पार्टनर के लिंग के आकार से कोई फर्क नहीं पड़ता और वह सेक्स सम्बंध स्थापित कर भरपूर रूप से बहुत ही आनंदित होती हैं. परन्तु पुरुष इस तथ्य को स्वीकार ही नहीं कर पाता है और आत्म ग्लानि का अनुभव करता रहता है जो अच्छी बात नहीं है क्योंकि यह व्यक्ति को अवसादग्रत कर सकता है. इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि वह वैज्ञानिक तरीके से इस बात को समझ सके कि सेक्स सम्बन्ध स्थापित करने और उससे आनन्दित होने में लिंग के छोटे या बड़े होने का कोई औचित्य ही नहीं है और यही सच भी है.


बहुतेरे पुरूष ऐसे भी हैं, उन्हें आप चाहे जितना भी समझा लो कि सेक्स सम्बन्ध स्थापित करने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उनके लिंग के आकार की स्थिति कोई समस्या ही नहीं है, बावजूद इसके, उन पर लिंग को बड़ा करने का धुन सवार हो जाता है तो यह नितान्त रूप से एक मानसिक समस्या है जिसके लिए उसे  मनोवैज्ञानिक तरीकों के उपचार की आवश्यकता हो जाती है और ऐसी स्थिति में पुरूषों को मनोचिकित्सकीय  सहायता अवश्य प्राप्त करनी चाहिए, जिससे वह भली-भांति इस समस्या को समझ सकें और इस मानसिक समस्या से मुक्त हो सकें.


ध्यान देने योग्य बात और सच्चाई भी यही है कि सेक्स सम्बन्ध स्थापित करने से प्राप्त आनन्द में लिंग के आकार का कोई लेना-देना नहीं है. बावजूद इसके, यह एक इतना बड़ा भ्रम है जो आदिकाल से ही पुरुषों को ग्रसता रहा है और उनकी मानसिक शांति को भी भंग करता रहा है और पुरुषों की इसी गलतफहमी का फायदा कुछ लोग अपने भ्रामक किस्‍म के आकर्षक और भड़काऊ विज्ञापनों के माध्यम से उठाते हैं और लोग इनके मकड़जाल में उलझ कर अपनी जिन्दगी को जंजाल बना बैठते हैं.


प्रत्येक पुरुष के मन में यही चाहत होती है कि उसके लिंग का आकार काफी बड़ा हो और वह इस बात को लेकर सदैव चिन्तित भी रहता है और इतना ही नहीं, बहुतेरे व्यक्तियों को तो इस बात को लेकर हीन भावना भी जकड़े हुए रहती है. इस तरह की परिस्थितियों के निर्माण में ब्लू फिल्मों का भी बहुत बड़ा योगदान है क्योंकि ब्‍लू फिल्‍मों के हीरो द्वारा फिल्माए गए दृश्यों को देखकर भी पुरुषों के मन में आत्म ग्लानि और हीन भावना का जन्म होता है.


व्यक्ति को यह बात बहुत ही भली-भांति समझ लेने की आवश्यकता है कि ब्‍लू फिल्‍मों में फिल्माए गए दृश्यों की गतिविधियों का सामान्‍य जीवन से कुछ भी लेना-देना नहीं होता. अतः ऐसी स्थिति की तुलना स्वयं से करके हीन भाव से ग्रसित होकर अपनी जिन्दगी को जंजाल बनाना कहां तक जायज है. व्यक्ति यह समझना ही नहीं चाहता कि ब्लू फिल्मों में जो वह देख रहा है उसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है. बावजूद इसके वह ब्‍लू फिल्‍मों में दिखाई जा रही चीजों और पोर्न स्‍टार की गतिविधियों से भी अपनी तुलना कर बैठता है और अपने मन में नकारात्मक ग्रंथियां पाल बैठता है जिससे पुरुष को नितान्त रूप से बचने का भरपूर प्रयत्न करना चाहिए.


ऑपरेशन जरूर इसका विकल्प है और इसके जरिए लिंग की लंबाई को कुछ इंच तक बढ़ाया भी जा सकता है परन्तु यहां एक बात समझने योग्य यह भी है कि ऐसे मामलों में में ऑपरेशन करवाने की कोई आवश्‍यकता है ही नहीं है क्योंकि अगर व्यक्ति ऑपरेशन करवा भी लेता है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इससे आपके महिला पार्टनर को मिलने वाले आनन्द में कोई अन्तर आएगा. यहां तक कि व्यक्ति को इससे उसके शारीरिक आनन्द में भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा. हां, इतना अवश्य है कि उससे व्यक्ति को एक प्रकार की मानसिक संतुष्टि अवश्य प्राप्त होगी क्योंकि व्यक्ति को इसकी जरूरत ही इसलिए महसूस हो रही थी क्‍योंकि उसने एक भ्रांत गलतफहमी यह पाल रखी है कि लिंग के आकार का यौन आनंद से कोई-न-कोई संबंध अवश्य है.


अतः व्यक्ति के लिए यह बात मान लेने की नितान्त आवश्यकता है कि सम्भोग सुख से प्राप्त आनन्द में न तो लिंग के आकार का कोई महत्व है और न ही ऐसे किसी ऑपरेशन की ही कोई आवश्यकता है.

यों तो पुरूष के लिंग का आकार उसके यौवन के आगमन के साथ ही बढ़ना शुरू हो जाता है और इस दौरान व्यक्ति के लिंग की लम्बाई और मोटाई में वृद्धि भी देखी जाती है परन्तु इसके बाद यह वृद्धि रूक जाती है और वृद्धावस्था में इसका आकार पहले की अपेक्षाकृत धीरे-धीरे कम होने लगता है जो कि प्रकृति के नियमों के अनुकूल है.

अक्सर लिंग के आकार को व्यक्ति का मोटापा काफी हद तक प्रभावित करता है क्योंकि मोटापा की वजह से व्यक्ति का वजन बढ़ जाता है और वजन बढ़ जाने की वजह से लिंग का कुछ हिस्सा तोंद की वजह से छुप जाता है जिससे लिंग का आकार कुछ कम दिखाई देता है. व्यक्ति को चाहिए कि वह ऐसी मानसिकता से स्वयं को दूर रखने की भरपूर कोशिश करे.


अन्ततः इतना तो स्पष्ट है कि बहुतेरे पुरूष अपने लिंग के आकार से कदापि सन्तुष्ट नहीं होते हैं और इन्हीं कारणों से बाजार में बहुतेरे ऐसे उत्पाद हैं जो लिंग के आकार को बढ़ाने का दावा भी करते हैं परन्तु सच्चाई इसके ठीक उलट होती है और ऐसे कोई भी उत्पाद कारगर नहीं होते हैं क्योंकि ऐसे उत्पादनकर्ताओं का एक बहुत बड़ा नेटवर्क है जो अपने आकर्षक और भड़काऊ विज्ञापनों के मकड़जाल में ऐसे असंतुष्ट लोगों को फंसाकर उनका भरपूर मानसिक और आर्थिक शोषण करते हैं जबकि ऐसे मामलों में व्यक्ति को चाहिए कि वह किसी कुशल मनोवैज्ञानिक से सम्पर्क कर उनसे अपनी मनोचिकित्सा करवाए ताकि उनके मन से हीन भावना का लोप सम्भव हो सके.

यहां पर विशेष रूप से इस बात पर ध्यान देने की नितान्त आवश्यकता है कि सम्पूर्ण विश्व में लिंग की लंबाई बढ़ाने से संबन्धित जो भी क्रीम, दवा, तेल या पंप आदि से संबन्धित विज्ञापन होते हैं वह पूर्णतया भ्रामक होते हैं और उन पर किसी भी स्थिति में यकीन करने से व्यक्ति को नितान्त रूप से बचने का प्रयत्न आवश्यक रूप से करना चाहिए.

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